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Wednesday, 26 August 2015

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय मे १७ सितम्बर १९३९ के प्रो- चांसलर डा . कामेश्वर सिंह क अध्यक्षीय व्यख्यान


महानुभाव ,
ई बैसार एहि विश्वविद्यालय क इतिहास क मीलक पथर हे व जा रहल अछि l एहि नामी शिक्षl पीठ क एक निर्माता(महामना मदन मोहन मालवीय )  आइ अहि से अधिकारिक रूप से अलग भ रहला हां. बरखो पहिने ओ एक सपना देखने रहयत l जे दिन क रौशनी क मोहनी छल l ओ सब  अपन  कठोर परिश्रम से सपना के  वास्तविकता मे परिणत केलैथ l अहि महान  देश क कतेक राजा – महाराज आउर लोग बाग अपन कन्हा अहि धुरी में लगौलैत अऔर काशी क पवित्र शहर मे गंगा क कछार में अहि संस्था के खरा केलैंह जे पुरना गुरुकुल अऔर आजुक विश्वविद्यालय क बीच एक कड़ी अछि l तक्षशिला ,नालंदा अऔर विक्रमशिला क पुनर्जन्म क सपना २० वीं शदी में अहि नालाग्राम क विरहत झेत्र मे सच भेल l आब वो सपना नहीं रहल l वो हमरा सब लेल ठोस मूर्त रूप भ गेल अऔर अबय वाला पीढ़ी  ओकरा कायम रखता अऔर गर्व महसूस करता l महामना  क उपहार , ईश्वर क अहि कार्य मे इच्छा अहि प्रमुख संस्था के अही ठाम नहि रोकत l उनकर देश लेल प्रेम हुनका विश्राम क अनुमति नहि दैत अछि  l ओ अपन आवाज से भारत के जगबैत रहला अऔर नेता , प्रजाक क शासक के सब धर्म क महत्वपूर्ण वीज के संरझित रैख भविष्य क महान विकास आउर  उन्नति एक नया रूप में प्रेरित केलैथ आउर  नव सभ्यता क भाव हुनक गौरव गाथा क बखान करैत अछि l मुदा आदमी क शरीर क अपन सीमा छै l हुनका लग्लैंह जे शारीरिक झमता अहि मशाल के थमने रहनैय क अनुमति नहि देत अछि l आउर  वो अपन राष्ट्र क अगला पीढ़ी के अहिठाम  से  आगू बढेवाक लेल थमा रहल छैथ l अहि पवित्र अवसर पर हम हुनका  अपन अपार आदर अर्पित करैत नमस्कार करैत छी l
महोदय , हम आइ दुखी नहि भ सकैत छी l हमरा वोहि दिन क स्मरण अतीत में ल जायत अछि जेखन हमर स्वर्गवाशी पिता  विस्वविद्यालय क स्थापना क योजना मे पूरा मोन से आदरणीय पंडित जी क संग मिलके कोष जमा करवा में नेतृत्व केलैथ .मालवीयजी क शुरू क हमर छाप अहि यूनिवर्सिटी से जुरल रह्वाक स्थायी अछि l हम हमेशा विचार करैत छी जे ओ बनरस हिन्दू यूनिवर्सिटी के मूर्त रूप देलैथ . अहि द्वारे बिना कोनो मलाल के हम दोसर तरहे सोचे छी मुदा इतवा हम निश्चित करव जे हमरा जे थोर संतुष्टि ई जैन के भेटल जे महामहिम लार्ड रेक्टर हुनका कुलपति पद छोरलाक  क  उपरांत विस्वविद्यालय क  उप संरझक मनोनीत केलैथ हां .
महानुभाव ,यद्यपि आब ओ विश्वविद्यालय क मामला मे सक्रिय रूप से भाग नहि लेता मुदा हमरा कोनो शंका नहि अछि जे हुनक ठोस  सेवा अऔर त्याग  केखनो हमरा सब के जे अहि विश्वविद्यालय के काज में लागल छी  हुनक उद्देश से भटक नहि देत  मार्गदर्शन अऔर  प्रोत्साहित करैत रहत l हुनक जीवन भैर क तपस्चर्य हमरा सबके डिग नहि देत आउर  जे महान उदहारण ओ  हमरा सब लग स्थापित   केलैथ ओ केखनो दृष्टि से अझोल नहि हैत l जेना अहाँ सब जनैत छी  पंडित मदन मोहन मालवीय मात्र  एक नाम नहि  छैथ वो  समस्त हिन्दू भारत क आत्मा क सूचक छैथ .ई हमरा सब  लेल संभव नहि अछि जे केना हुनक कृतज्ञता ज्ञापन करी . हमरा सब लेल गर्वक गप्प अछि जे हम सब हुनक राष्ट्र क छी ,गर्व अछि जे हम सब सब वोहि जाति से छी जे एहन महान मेधावी उत्पन्न केलक आउर  ई हमर सबहक सौभाग्य अछि जे हुनक विशाल  ज्ञान आउर   अनुभव एखनो हमरा सब के उपलब्ध अछि l वो स्वास्थ्य और दीर्घायु होयत !. 
हम सब अपना सब के धन्यबाद देब जे हमर सबहक  अहि महान राष्ट्रपुरुष से एक दोसर महान राष्ट्र पुरुष( डा. सर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ) जे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लब्धप्रतिष्ठित  विद्वान ,एक स्वाभाविक चिन्तक आउर  भारतीय धर्म और दर्शन क एक अधिकारिक वेत्ता क  हाथ में दीप  जायत.lई कहब उचित हायत जे अहि विश्वविद्यालय क नियंतण क मामला पूरब और पश्चिम क समन्वय बनेवाक उद्देश्य मुख्यतः वोहि व्यक्ति क हाथ में जेवाक चाही जे अहि विषय पर विशिष्ट अध्ययन आउर  पूरा परिश्रम ,उत्साह एवं  निपुणता से अपन  नियम के व्यवहार में लाबयत l .फेर, ध्यान देवाक योग्य अछि जे ओ अपन सम्बन्ध कोलकाता और ऑक्सफ़ोर्ड से जारी रखता l . हमरा पूर्ण आशा अछि  जे अहि तरहे वो पुरवी और पश्चमी संस्कृति आउर  सभ्यता से प्रभावकारी संपर्क स्थापित करवा में सक्षम होयता l  हुनका सफलता क शुभकामना आउर  प्रार्थना अछि जे हुनक कुलपति क कार्यकाल मे विश्वविद्यालय उन्नति करे तथा  जहि उदेश्य लेल एकर स्थापना भेल ओ पूरा हो l

                                                       ( अंग्रेजी से मैथिलि मे अनुवाद . ....)  

Monday, 24 August 2015

बिहार क भूकंप आउर दरभंगा

 १५ जनवरी ,१९३४


 दिन के दू बजय मे १५ मिनट बांकी छल धरती प्रचंड रूप से डोळ्य लागल लोग दहशत में सब माल असवाब छोउर घर से  बाहर पड़ा लगला l गडगडाहट क आवाज जेना कोनो भारी लौरी या हवा जहाज नजदीक से गुजैर रहल हो , इ एकटा संकेत छल ,लेकिन लोग जा धरि बुइझ सकैत मकान ठनमना लागल , धरती से बौल ,कादो  आउर पानि फब्बाडा जेना छुटS   लागल देखनिहार के लग्लैंह जे जलप्रलय  आयेब गेल l लेकिन ई प्रकृति क क्रुद्ध –दृष्टि छल जे पांच मिनट रहल l वहि पांच मिनट जे नष्ट भेल ओकरा बनबे में कतेक शदी लैग जायत लेकिन जे जिन्दगी गेल ओकर भरपाई अहि धरा पर कोई नहि द सकैत अछि l आकाश खसल  मकान क मलवा से भैर गेल और पुरुख  ,मौगी  , बच्चा सबहक क्रंदन चहु दिश गूंजे लागल जिनकर अपन लोग अहि दुनिया के हुनका सबके बेसहारा  छौर चुकला  सहारा और सनेह के बिना भ गेला l
 जिलाधिकारी ,दरभंगा जिला क सुदूर झेत्र क यात्रा पर रहैत वो मुख्यालय से हुनक संपर्क एकदम तुइत गेल वो तीन दिन क बाद दरभंगा पहुँच सकला l दरभंगा क महाराज अपन परिवार क अधिकतर  लोगक संग कोलकाता में छलाह l वही स्थिति में अहि विपदा क समय मे राहत कार्य चलेवाक जिम्मा दरभंगा राज क मुख्य मैनेजर जी . पी . डेनवी ओउर राजक कर्मचारी / पदाधिकारी ,दरभंगा क एस.पी मिस्टर  जे .इ . पार्मन ,सिविल सर्जन लेफ्टिनेंट कर्नल जे . सी . जॉन आउर सदर एस.डी.वो पर जवावदेही आएब गेल जे अहि भीषण भूकंप में जे प्रलय भेल वोहि से तुरंत  निपतल जाय  l ई उलेख्ख करब अहिठाम उचित हयत जे सेवा भावना से  वियतनाम फर्म पॉल & कंपनी के मिस्टर जी . लाकोव्स्क्य जे व्यापार क सिलसिला में दरभंगा में रहयत आउर मिसेस डेनवी आउर  नर्स सब बिना कोनो समय गवेने घायल सबके प्राथमिक इलाज देवा में जुइत गेलाह l
राज मुख्यालय म हताहत भेल l युवराज कुमार जीवेश्वर सिंह ओउर हुनक माता संयोग से बचली जेखन वो सब लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस से बहरा रहल छला सीढ़ी क ऊपर का हिस्सा अलग भ गेल जेखने वो सब बरसाती  में कार से विदा भेली महल क भारीभरकम घंटाघर  जमीन पर धराम से खसल एको पल  क देरी भेला से गंभीर परिणाम भ जेते .हुनका सब के मैदान के सुरझित जगह नर्स लग ल जायल गेल . मिसेस हर्ड वाइट जे पीठ पर पजेबा खसला से घायल छेली अपन बुद्धिमता गवाने बिना आउर  कर्तव्य बोध से सेवा सुशुर्षा मे लागल छेली l  राज हस्पताल मे भारी हताहत वस्तुतः बेशी भेल कियाकि पूरा ढांचा एक बारगी खाईस गेल l अहि लेल हस्पताल क महकमा  द्वारा राहत कार्य मे  पूरा तत्परता देखेलाक बाबजूद गरीब आहत लोगोक जान नहि बचौल जा सकल l सौभाग्यवश राज परिवार क सदस्य जे दरभंगा में रहेत वो सब घायल नहीं भेला l राज तोशखाना  खईस पडल बेशकीमती चीज के निकलवाक परम जरुरत छल l लोग खसल मकान में जेवा स डराय   छल लेकिन मिस्टर डेनबी अपन कर्तव्य और जबाबदेही बुझैत आगू बढ्ला और एक एक चीज बरामद क लेलैथ l
करीब एक हजार मजदूर राज द्वारा भूकंप क तुरंत बाद मलवा आउर मकानक खतरनाक हिस्सा के साफ करवा लेल लगौल गेल l वो सब मात्र राज एरिया मे नहि बल्कि एक सप्ताह धरि बाजार एरिया मे कार्य केलक ओकर बाद सरकार अपन आदमी राजक जमीन से बाहर तैनात केलक . बांस और खर शीघ्र जमा क राज क आदमी संग- संग जिलाधिकारी के जरूरतमंद  लोगक बीच बंटवा लेल उपलब्ध करौल गेल l  
प्रान्त क विभिन्न भाग मे सरकारी महकमा द्वारा कैएल गेल काज आउर सरकारी मकान क क्षति क लेखा जोखा आउर प्रभावित क्षेत्र क हालात पर राहत आयुक्त क बिहार भूकंप १९३४ क रपट बिहार आउर उडीसा सरकार के देल गेल ओकर बखान करवाक आवश्यकता अहिठाम जरुरी नहि अछि लेकिन ई उलेख्य करब जे दरभंगा जिला मे सरकार आउर राजक महकमा कन्हा से कन्हा मिलाके काज केलैथ अन्यथा अहि भारी जवाबदेही से पार पेनैय संभव नहि हेते l
लहेरियासराय हस्पताल जा धरि काज शरू करते राज हस्पताल पहिल छल जे काज शरू केलक पूरा शहर क जरुरत  के सम्हारलक. पहिल रौटी पोलो मैदान मे हस्पताल क मरीज लेल लागल जे राज द्वारा देल गेल छल . अस्थायी छप्पर बनबय लेल मुफ्त मे सामग्री बाँटल गेल l
बचाव आउर राहत   वहि दिन से अनवरत दिन राति शरू भेल ई देखवा में आइल जे सबकिछु बेस फुर्ती आउर तत्परता से भेल .बिपदा जेतेक पैग रहे वोहि से कमतर मनुख क  दुःख नहि रहेl
अबय वाला राति बेस सर्द छल आउर अधिकतर लोग रेलवे टीशन पर पनाह लेलैथ l  बहुत रास घरविहीन लोग आकाशतर रमना मे राति गुजर केलैथ –गुज गुज अन्हार पसरल, अभाव क सम्राज्य ! सब संचार व्यव्य्स्था विच्छेद ;ट्रेन बंद ;पुल मुंह बायब देने छल ; टेलीफ़ोन – टेलीग्राफ ठप्प आउर वाट – घाट चलवाक योग्य नहि l
वोहि दुर्भाग्यपूर्ण दिन क अपन अनुभव बतबैत दरभंगा क महाराजधिराज जे कोलकाता में छलाह मार्च १९३४ में इंडिया पोस्ट क प्रतिनिधि के दिल्ली मे अपन सझातकार मे जे कहला ओ निचा प्रस्तुत अछि :--
“ हम वरंडा पर टहैल रहल रही तेखने  हम देखल जे  हमर कोलकाता हाउस ( १ , मिडिलटन स्ट्रीट ) क झाड़- फानूस उग्र रुपे डोयल रहल अछि ओउर केवार चरचरा लागल . हमरा  पाहिले लागल जे चौरंगी रोड पर भारी वाहन चलवाक कारण ऐना भ रहल अछि मुदा तुरत मे बुझवा में आएब गेल जे ई से नहि छी . ई भूकंप छी . हम जल्दी से घरक पछुवार क घुमावदार सीढ़ी से निचा उतैर गेलोइंह अऔर अपन भाई जे बेमारी क कारण शैया पर सुतल छलाह हुनक चिंता सतब लागल . राहतक साँस लेलेलोएँ  वो तुरते बाहर निकलला और परिवारक आन सदस्य बाहर आएब गेला और सूट खतरनाक जोन से बाहर छल .किछु क्षण लेल हम सब पथरा गेल रही ---८ मिनट मे फेर सब सामान्य भ गेल . मकान (  सै बरख पुरान) मे मामूली दरार आएल , मुदा वो असुरझित नहि रहे .हमरा लागल जे कोनो विपदा बिहार में घटित भेल  हं l करीब दू घंटा में हमरा लग समाचार आएल जे जमालपुर में भारी क्षति भेल लेकिन दरभंगा क कोनो समाचार नहि छल  l अगला दिन भोर मे पूर्णिया क थोर समाचार भेटल मुदा दरभंगा गौण रहे l हम सोचलोइंह ‘ नहि समाचार त नीक समाचार ‘ मुदा तेसरका दिन समाचार क माध्यम से हवाई जहाज चालक क मुज्ज़फरपुर से रिपोर्ट देखल जहि में दर्द्पूर्ण समाचार छल l हमरा  दरभंगा और दरभंगा में अपन कुटुंबजन ल काफी व्यग्र क देलक l एक तरफ हम जेवा लेल हवाई जहाज चार्टर करवा लेल और सब सुचना उपलब्ध करेवाक आदेश देल और दोसर तरफ टेलीफोन से हम गवर्नमेंट हाउस ,पटना और कोलकाता से संपर्क सधवा मे जुइम गेलोइंह l दुर्भाग्यवश हवाई जहाज मे किछु खराबी ऐएब गेल और दूरभाष से जे सुचना भेटल ओ बहुत थोर छल जे मोन क शांति नहि द सकल l हमर चिंता बढे लागल . घटना क पंचम दिन हमर सार दरभंगा से पहुँचलाह और भूकंप से उत्तर बिहार में भेल त्रासदिक भयंकरता क लेखा जोखा देलैथ l सौभाग्यवास हमर परिवारक सदस्य जे ओहिठाम छलाह बाल-बाल बचलैथ lहम शीघ्र दरभंगा लेल किछु हद तक रेल और कार से प्रस्थान केलोइंह .प्राकृतिक किछु मिनट क तमाशा से जे बदलाव भेल इ देख आंखि पर विश्वास नहि भ रहल छल l . नदी क पेट  ऊपर आएब गेल रहे , पुल ध्वस्त ,उपजा वाला खेत बौल से भरल ,धरती में दररैर आउर धरती क सतह चिन्ह्वा योग्य नहीं रहे . दरभंगा विकराल दृश्य उपस्थित क रहल छल . आर लोग जेना हम पूर्णरूप से घरविहीन भ गेल रही  आउर विभिन्न रूप में भारी नुकसान रहे l लोग हमरा सांत्वना देवाक लेल आयल  रहैत  मुदा हम विचार केलोंहि जे मुश्किल से कोनो मनुख  हेता जे सांत्वना  आउर सहानभूति के योग्य नहि होयत जे एकटा मानव मोन  एक दोसर के अर्पण करैत हो l  नुकसान क मूल्य मुद्रा में भले हीं लोगोक सामर्थ्य क अनुपात मे भिन्न हो मुदा नुकसान क अनुपात जे बेशी लोग के भेल वही में विभेद केनाय मुश्किल l ई देखवा  योग्य भ गेल जे सार्वजानिक  विपदा शक्तिशाली सामाजिक साम्यता क समर्थक अछि l मुदा अहि मुश्किल समय में हिम्मत नहि हारवाक अछि l दोसर तरफ हिम्मत , निश्चय  आउर आशा क एखन मांग अछि l हमर मोन में आयेल जे यदि हम सब अहि स्थिति क बढियां स सदुपयोग क सकी  त अहि विपदा के खुशहाली में बदलल जा सकैत अछि l अहि द्वारा हम निश्चय केएल जे परिवार क सदस्य लोकेन के कोलकाता ल जाय जधरि हुनका सब लेल अस्थायी घर नहि बैन जयत अछि  आउर हम वही सब व्यक्ति ,सरकार  आउर विभिन्न राहत संस्था के कृतज्ञता ज्ञापन करैत छी जे पीड़ित लोग   क बीच घरक सामग्री ,कपडा ,टाका – कैंचा  आदि से मदद पहुंचेलैथ. हम अहि बात से भिज्ञ छी  जे साधनक क कमी  आउर आभाव अछि मुदा अहि राहत उपाय क पाछू जे महान भावना अछि ओकर प्रशंसा  के बिना नहि रहय सकैत छी . लोगक बीच वर्ग - संप्रदाय बिसैर के  आउर पधाधिकारी -गैर पदाधिकारी एक भ लोक कल्याण क भावना से मोन से  प्रेरित छैथ l 

Sunday, 19 July 2015

SANAD

         The Sanads  given below as (a) to (c) are mentioned and relied upon in the Sadar Dewany      Adawlat
                                                                                                                                                      Judgement, dated the 17th February 1844 :--
(a)   Sanand granted by Maharaja Bishnu Singh, dated the 9th chait Sudi,1150(1742-43 A. D. ).

Maharaja Sri Bishnu Singh, the Lord of Lords and always victorious in battle, to the abode of all blessings, the prosperous Maharaja Kunwar Babu Sri Narendra Singh (may he live long ), blessings:--
        On account of illness I have become very weak . I therefore give you the Raj of Trhut and Dharampur, etc., with the Malikana Dasturs pertaining to Raj. You shall possess them. You shall maintain intact the provisions for maintenance of the females made by the late Raja and also those made by myself; I have made you my Karta.
(b)    Sanad granted by Maharaja Pratab Singh Bahadur , dated the 13th Asar Sudi, 1182.

Maharaja Sri Pratab Singh Bahadur , the Lord of Lords and victorious in battles , to the abode of all good and all blessings, the prosperous Sri Madho Singh, blessings:--
        I have now become old and there is no certainty of life. I am constantly affected with illness more and more serious, so I have gigiven you the Raj of Sirkar Tirhut and Pargana Dharampur and Malikana Dasturs of the Raj and Nankar, Mokarri, and Kamat villages and land, the property possessed and enjoyed by me . Being installed in the Raj, you will enjoy everything and pay the revenue of the Government. I have got no children and so I have made You Karta.
(c)    Sanad granted by  Maharaja Madho Singh , dated the 5th sSawan Sudi, 1186.

Maharaja Sri Ragho Singh, the most noble and always victorious in battles , to the abode of all good and all blessings, the prosperous Maharaja Kunwar Sri Bishnu Singh, blessings:--

     I have given you the whole Raj of Tirhut, Mokarri, and Nankar villages and Dharampur and all the Malikana Dasturs and the Rajgi rights which I enjoy. You shall possess and enjoy the same, you shall maintain intact the assignments. I have made the maintenance of your younger brother Babu Sri Narendra Singh ( may he live ling ) as a Babu and the provisions I have made for the support of his family.

Tuesday, 16 June 2015

बिहार विधान परिषद् के १३३ वें सत्र में सर्व श्री अनिरुद्ध प्रसाद ,शकील अहमद खान ,रामजी प्रसाद शर्मा ,रामकृपाल यादव एवं राम प्रसाद सिंह , स , वि. प. द्वारा दरभंगा महाराज की मृत्यु के पश्चात् गठित ट्रस्ट द्वारा अनियमितता वरते जाने के सम्बन्ध में सरकार का ध्यान आकृष्ट किया जाना

श्री शकील अहमद खान : माननीय सभापति महोदय , दरभंगा महाराज की मृत्यु १ ओक्टुबुर १९६२ को हो गयी l उन्होंने मरने के पूर्व एक बिल किया था , जिसके अनुसार उनकी सारी संपत्ति की एक तिहाई से होनेवाली आमदनी को पब्लिक चैरिटी पर खर्च होना है , जिसके लिए एक ट्रस्ट की स्थापना की गई l उक्त ट्रस्ट द्वारा स्व . महाराज की इच्छा के विपरीत पब्लिक चैरिटी के लिए सम्पति कौड़ी के मोल में बेचीं जा रही है और उसका उपयोग पब्लिक चैरिटी के अतिरिक्त अन्य कार्यों में किया जा रहा है , बिल के विरुद्ध है l उदाहरणार्थ , श्री गिरीन्द्र मोहन मिश्र जी ( श्री मदन मोहन मिश्र )का आवास वाली ३७ कट्ठा जमीन २ लाख ७ हजार प्रति कट्ठा के हिसाब से विकी है , जो की कम है और उससे ऊँची हैसियत की जमीन श्री द्वारिकानाथ झा वाली आवासीय जमीन ३९ कट्ठा मात्र एक लाख , सत्रह हजार रूपये कट्ठा की दर से विक्री की गयी है , जिसका निबंधन लंबित है और खरीददार को कब्ज़ा दे दिया गया है l पब्लिक चैरिटी पर अभी तक कोई खर्च नहीं हुआ है और सारे पैसों का दुरूपयोग किया जा रहा है l
अतः उपर्युक्त विषय के संबंध में सरकार से सदन में स्पष्ट वक्तव्य की मांग करता हूँ l
श्री रमई राम( मंत्री ); महोदय , जिलाधिकारी , दरभंगा के प्रतिवेदनानुसार स्थिति इस प्रकार है :
    अंतिम दरभंगा महाराज कामेश्वर सिंह की मृत्यु दिनांक १. १०.६२ को हुई l मृत्यु के पूर्व ५.७.६१ को उन्होंने एक बसीयत बनाया था ,जिसके अनुसार तीन अनुसूचियों के अनुरूप अपनी सम्पतियों को बांटा l

 बसीयत के अनुसार १/३ हिस्सा पब्लिक चैरिटेबल परपस के लिए दिया था l

बाद में महाराज के कई परिवारिक सदस्यों ने कई मुकदमें महाराज के पैत्रिक कोर्ट ( कलकता उच्च न्यायालय ) में किये l अंततः यह मामला माननीय उच्चतम न्यायालय में गया और ५.१०. ८७ को फॅमिली सेटलमेंट हुआ l इस सेटलमेंट के अनुसार Resudary Estate के पब्लिक चैरिटेबल कार्य हेतु जो सम्पति रखी गयी , उसमे प्रश्नगत भूमि भी शामिल है l Resudury एस्टेट में वर्णित सम्पति की देख – भाल ट्रस्ट के द्वारा किए जाने की व्यवस्था थी l resudury एस्टेट में जो सम्पति चैरिटेबल प्रॉपर्टी के लिए रखी गयी थी , उसकी व्यवस्था महाराजा कामेश्वर सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा की जनि चाहिए थी l२५. ३. १९९२ को त्रुस्टी ने महाराजा कामेश्वर सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट और दरभंगा निबंधन कार्यालय में एक डीड कार्यान्वित किया , जिसमे ट्रस्ट का एम्स एवं ऑब्जेक्ट निर्धारित किया गया l
 l
एक ट्रस्टी श्री डी. एन . झा ने समाहर्ता को यह जानकारी दी कि इस एम्स एवं ऑब्जेक्ट के अनुसार ही लगभग ढाई – तीन माह पूर्व बंगला नंबर ५ के उच्चतम निविदादाता डा . संजय कुमार झा ने तत्काल १४.३५ लाख रूपये जमा किया l उसके अनुसार दर ९१ हजार रूपये प्रति कट्ठा है l श्री झा के अनुसार बंगला नंबर -२ के उच्चतम निविदादाता ने २ लाख ७ हजार रूपये प्रति कट्ठा दर भरा , परन्तु राशि जमा नहीं की l
इस नीलामी / बिक्री पर स्थायी रोक हेतु व्यव्याहर न्यायालय , दरभंगा में स्वत्व्वाद संख्या ५ /९९ दायर है l जिसके कारण सम्पति के निबंधन का कार्य अभी नहीं हुआ है l
डा. नीलाम्बर चौधरी : महोदय , माननीय मंत्री महोदय से मैं यह जानना चाहता हूँ की ६२ के बाद अभी तक चैरिटी ट्रस्ट में कितना पैसा जमा हुए और उसमे क्या काम हुआ ? मैं ये जानना चाहता हूँ l
श्री रमई राम (मंत्री ): हुजुर , इनके प्रस्ताव में इसकी चर्चा नहीं थी कि ६२ के बाद क्या हुआ , इसके लिए समूचा रिकॉर्ड देखना होगा ... कितनी सम्पति ..
सभापति : मूल प्रश्न जो जानना चाहते हैं माननीय सदस्य कि ...
श्री रमई राम (मंत्री ): मूल प्रश्न अभी ...
डा. महाचंद्र प्रसाद सिंह : पब्लिक चैरिटी पर अभी तक जो खर्च हुआ है और महोदय .. सारा पैसे का दुरूपयोग किया जा रहा है l सीधा प्रश्न है l
श्री रमई राम ( मंत्री ): महोदय , आपसे आग्रह करेंगें कि यह लम्बा मामला है , इसके लिए समय चाहिए l माननीय सदस्य , जिससे कहेंगें , जाँच करायेंगें और जाँच करा कर प्रतिवेदन ...
                                                    ( व्यवधान )
 डा . महाचन्द्र प्रसाद सिंह : ये  राज्यहित में है , आपके हित में है l हमसब अनुभव कर रहे है कि इसका मिसयूज काफी हुआ है l
श्री रमई राम (मंत्री ): नहीं ,हम आपसे आग्रह करते हैं महाचंद्र बाबू , चौधरी जी से भी आग्रह करते हैं की इनसे कहिए, इसकी जाँच कराके प्रतिवेदन माननीय सभापति महोदय को सुपुर्द कर दें l
आवाजें : कब तक ?
श्री रमई राम (मंत्री ) : जब कहेंगे , तब l
श्री रामकृपाल यादव : महोदय ,
श्री भोला प्रसाद सिंह : हमलोग तो आजकल कहते हैं l लेकिन दरभंगा  महाराज की सम्पतियों का  मामला जो है , ट्रस्ट का मामला है , केवल दरभंगा महाराज तक सीमित नहीं है , यह बिहार की प्रतिष्ठा , ख्याति का सम्बन्ध है l अगर उसके ट्रस्ट में ,उसकी जमीन पर यूनिवर्सिटी बनी , उसकी जमीन पर और उसकी जायदाद का जो दुरूपयोग हो रहा है , तो हर बिहारी से यह कंसर्न है l आप इसकी जाँच इनके अधिकारियों से करायेंगे या कोई एजेंसी से करायेंगे , लेकिन जाँच करा लीजिए, क्योंकि हमलोग भी सुनते हैं कि दरभंगा महाराज के पैसों का , उनकी जमींदारी की जमीन है जिसमे म्यूजियम बनवाया और भी चीज बनवाया , यूनिवर्सिटी बनवाया , काफी उसकी लूट हो रही है l इंडियन नेशन , आर्यावर्त की लूट हो रही है तो इसके लिए जरुरी है कि सम्पूर्ण ट्रस्ट की जाँच हो जय और आप यदि समझिए तो सदन की समिति से जाँच करा लीजिए l
श्री रामकृपाल यादव : मेरा भी सप्लिमेंटरी का अधिकार है l
सभापति : हाँ , बोला जाएl l
श्री रामकृपाल यादव : महोदय , ऐसा लगता है कि जो मूल प्रश्न है , सर , ध्यानाकर्षण के माध्यम से , उसका खुद ही संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं , वे खुद ही एहसास कर रहे हैं l चूँकि यह राज्यहित का मामला है और किसी खास व्यक्ति का मामला नहीं है , राज्यहित का मामला है , करोड़ों – करोड़ की प्रॉपर्टी का मामला है और उसका दुरूपयोग हो रहा है , इससे राज्य का अहित हो रहा है , इसिलिय हम चाहेंगे कि माननीय मंत्री जी , चूँकि सब सदस्यों ने चिंता जाहिर की है कि इन तमाम मामलों के जो आरोप हैं , उसकी तह में जाने की जरुरत है l इन तमाम मामलों की जाँच कराने की आवश्यकता है l हम निवेदन करना चाहेंगें माननीय मंत्री से , चूँकि उन्होंने कहा है कि मुझे कोई आपत्ति नहीं है , हम जाँच के लिए तैयार हैं , तो हम जानना चाहेंगें माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से कि क्यों नहीं सदन की कमिटी आप बना देते ? तमाम तथ्यों की जानकारी आ जाएगी और दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा l एक कमिटी बना दीजिए सदन की और स्वयं तैयार भी हैं माननीय मंत्री जी और मैं बिलकुल सत्य भावना से यह बात रख रहा हूँ l
श्री रमई राम ( मंत्री ) : हुजूर , मैं अपने जवाब में कह सकता हूँ कि जिला समाहर्ता , दरभंगा के प्रतिवेदनानुसार हमने जवाब दिया है , यह स्पष्ट हम कहते हैं l

                         ( व्यवधान )                   
                         ( व्यवधान )                      
सभापति : आप सुन लें l
श्री रमई राम ( मंत्री ): जो भी जवाब दिया है , हम उसकी चर्चा कर रहे हैं ,आप सभापति महोदय ,जो आदेश देंगें , हम उसको मानने के लिए तैयार हैं l
      ( इस अवसर पर अनेक माननीय सदस्य एक साथ बोलते रहे )
श्री नवल किशोर यादव : सभापति महोदय , मैं ...
श्री भोलाप्रसाद सिंह : इसमें समिति सरकार ही बना दे l कोई जरुरी नहीं है कि अध्यझ ही बनायें , सरकार भी बना सकती है , तो सरकार ही बना दे l
सभापति : एक आदमी बोलिए न l
श्री नवल किशोर यादव : सभापति महोदय , सिर्फ चैरिटी के माध्यम से पैसा खर्च नहीं किया गया है , सिर्फ एक पॉइंट की बात कर रहे हैं l इसमें माननीय सदस्यों ने लिखा है किकौड़ी के भाव में उनकी संपतियां बेचीं जा रही है , इस प्रश्न पर हमलोग नहीं आए , दूसरी तरफ उन्होंने उदहारण दिया है कि गिरीन्द्र मोहन मिश्र जी के आवास वाली ३७ कट्ठा जमीन २ लाख , सात हजार रूपए प्रति कट्ठा के हिसाब से बिकी है , जो कि कम है l दूसरा उदहारण दिया गया है कि द्वारिकानाथ झा वाली आवासीय जमीन ३९ कट्ठा मात्र एक लाख , १७ हजार रूपए कट्ठा की दर से बेचीं गई है , जिसका निबंधन लंबित है l इसलिए सभापति महोदय , हम चाहते हैं कि जो इसमें मूल प्रश्न है कि इनकी सम्पतियों को कौड़ी के भाव , मतलब किसी तरह या तो निबंधन कम दाम पर कराया जा रहा है या फिर किसी को इसी तरह दे दिया जा रहा है चैरिटी शो में , पैसा नहीं जाय इसके लिए इसमें भी हमलोग , सदन जानकारी चाहती है l
डा . महाचंद्र प्रसाद सिंह : जाँच के पीरियड में निबंधन पर रोक लगे , नहीं तो बैबाद हो जाएगी सम्पति सब , तो फिर जाँच किस चीज की होगी ?
                     ( व्यवधान )
सभापति : एक मिनट l माननीय सदस्य डा . महाचंद्र सिंह ने कहा है किअगर आप इससे संतुष्ट नहीं हैं जो उत्तर आपके पास आया है , जिलाधिकारी के प्रतिवेदन के आधार पर तो इस बीच में क्या सरकार निबंधन के ऊपर प्रभावी रोक लगा देगी उस समय तक  के लिए जबतक कि इसकी पूरी जाँच न हो जाए , यह माननीय सदस्य जानना चाहते हैं l
श्री रमई राम (मंत्री ): सभापति महोदय , आपके आदेशानुसार , निदेशानुसार मैं निबंधन विभाग को लिखवा दूंगा विभाग से कि तत्काल जबतक जाँच नहीं होती है ,इसका निबंधन न किया जाए l
आवाजें : क्याकह रहे हैं ?
सभापति : नहीं , निबंधन पर रोक लगाने के बारे में सरकार ने कहा कि वे आदेश दे देंगें ताकि निबंधन इस बीच में न हो और जाँच के बारे में जो निर्णय होगा , उसके आलोक में जाँच की जाएगी l
श्री रामकृपाल यादव : माननीय मंत्री जी तैयार हैं किसी भी समय जाँच के लिए तो क्या दिक्कत है ?
                    ( व्यवधान )
श्री भोलाप्रसाद सिंह : सरकार भी समिति बनती है l मुझे भी कम से कम सुनील मुखर्जी के साथ मेंबर रहने का मौका मिला है l सरकार ही समिति बना दे l कोई जरुरी नहीं है कि सदन का अध्यझ ही समिति बनाये l
सभापति : ठीक है
                   ( व्यवधान )
सभापति : माननीय उप नेता कुछ कहना चाह रहे हैं l
श्री रामनंदन सिंह : सभापति महोदय , माननीय सदस्य शकील अहमद साहब एवं अन्य  माननीय सदस्यों ने जो ध्यानाकर्षण किया था , वे लोग अभी हैं नहीं l
श्री शकील अहमद खान ( बैठे – बैठे ) : हम हैं l
श्री रामनंदन सिंह : और माननीय मंत्री जिस समय पढ़ा गया था और माननीय मंत्री ने जवाब दिया , उसमे एक बेसिक पॉइंट जो है इसमें पूछा गया , तो कहा कि इतना नहीं है तो अच्छा होगा की १९ तारीख को जो आपने अभी उठाया है उसको छानबीन के बाद जवाब दिया जायेगा l
श्री रमई राम (मंत्री ) : नहीं , नहीं l छानबीन नहीं हो सकती है l  इतना जल्दी कैसे होगा l इसलिए आप जाँच करा लीजिये l जिससे करना है , हम तैयार हैं l
सभापति : माननीय सदस्य श्री भोलाप्रसाद सिंह ने एक प्रस्ताव दिया कि सरकार इस विषय को गम्भीरता को देखते हुए सम्पति का दुरूपयोग नहीं हो , नाजायज उसका उपयोग न हो , इसके लिए सरकार स्वयं एक समिति विधिवत गठित कर दे और उसमे सरकार अगर चाहे तो जनप्रतिनिधियों को भी शामिल कर सकती है l क्या सरकार ऐसा निर्णय लेगी ?
श्री रमई राम ( मंत्री ) : महोदय , मैं पहले ही कह चूका हूँ कि आसन का जो निर्देश होगा उसमे माननीय सदस्य है , चौधरीजी भी रहेंगें l
श्री शकील अहमद खान : माननीय सभापति महोदय सरकार तो हमारे मुख्यमंत्री जी है ...
                    ( व्यवधान )
श्री शकील अहमद खान : महोदय , आसन का निर्देश हो जाय l
सभापति : सरकार इस मामले में उच्च अधिकार प्राप्त एक समिति का गठन करे जो एक महीने के अन्दर जाँच प्रतिवेदन अपना सरकार को समर्पित करे l   

क्या सरकार ने उच्च अधिकार समिति गठन की ? क्या समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी ?क्या जाँच के दौरान भूमि के निबंधन पर रोक लगी ?  जारी देखते रहें हमारा ब्लॉग ...... 

Monday, 15 June 2015

कैसे मिली मिथिला यूनिवर्सिटी को दरभंगा राज का मुख्यालय

१९७५ आपातकाल का समय दरभंगा के जिलाधिकारी ने डी आई आर के तहत दरभंगा राज के हेड ऑफिस पर कब्ज़ा कर लिया . महाराजा के विल के एक्सकुएटर पंडित लक्ष्मी कान्त झा ने इसके खिलाफ माननीय पटना उच्चन्यायालय में एक याचिका दाखिल की .फिर सरकार से हुई समझौता और कुछ लाख रूपये में दे दी सैकड़ों एकड़ जमीन – भवन ,महारानी ने भी राजकुमार शुभेश्वर सिंह के सहयोग से  बेच दी अपना महल नरगोना और संलग्न बगीचा .....
जिलाधिकारी ,दरभंगा के आदेश संख्या १८३५ /एल  दिनांक १६.८. ७५ के द्वारा एक्सेकूटर लक्ष्मी कान्त झा को डिफेन्स ऑफ़ इंडिया रूल १९७१ के सुसंगत प्रावधान के आलोक में दरभंगा राज के भवन एवं भूमि अधिगृहित करने की सूचना दी गयी जिसके खिलाफ पंडित लाक्स्मिकांत झा ने माननीय पटना उच्च न्यायालय में सी . डब्लू .जे . सी . नंबर १७८६ /७५ दाखिल की . वाद के निपटारा से पूर्व हीं बिहार सरकार और दरभंगा राज के बीच समझौता हुई और जिलाधिकारी के आदेश और उक्त वाद को वापस ले लिया गया और १२.९.१९७५ को हुई इस समझौता के आलोक में १३३ एकड़ भूमि और भवन विस्वविद्यालय हेतु दी गयी . महारानी और दरभंगा हाउस प्रॉपर्टी लि . द्वारा दी गयी जमीन इसके अतिरिक्त है उक्त समझौता कमिश्नर ,शिझा विभाग,बिहार सरकार  और लक्ष्मीकांत झा के बीच हुई जिसपर इनदोनो के अतिरिक्त राजकुमार शुभेश्वर सिंह , रामेश्वर ठाकुर और द्वारिका नाथ झा के दस्तखत हैं, में तत्काल यूनिवर्सिटी को ५७ बीघा जमीन जिसमे राज हेड ऑफिस का अगला पूरा हिस्सा और पीछे का कुछ हिस्सा ,यूरोपियन गेस्ट हाउस ,आगे का फील्ड और मोतीमहल एरिया दी गयी और तत्काल १० लाख रुपया राज को देने की बात थी और शेष जमीन और भवन को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अधिग्रहण करने की बात थी .राज पुस्तकालय की करीब ६०  हजार दुर्लभ पुस्तक उपहार में राज द्वारा यूनिवर्सिटी को दी गयी .महारानी द्वारा ६० एकड़ जमीन बगीचा सहित नरगोना पैलेस दी गयी और दरभंगा हाउस प्रॉपर्टी ने  ६ बीघा  जमीन जिसमे गिरीन्द्र मोहन रोड स्थित बंगला नो .११ मात्र ६ .५१  लाख रूपये में यूनिवर्सिटी को दी गयी...क्या  यूनिवर्सिटी को शेष  भूमि भू अर्जन के तहत हुई या नहीं ?.जारी देखते रहें हमारा ब्लॉग ..
  . 
फॅमिली सेटल्मेंट के तहत schedule IV और V किसी की निजी सम्पति नहीं है जो निम्न है --
       १. न्यूज़ पेपर & पब्लिकेशन लि. का ५००० शेयर
        २. राज हॉस्पिटल कंपाउंड एरिया , दरभंगा

         ३.दरभंगा के गिरीन्द्र मोहन रोड स्थित बंगला नंबर २ और ५  और ८ जिसका कुल रकवा ५  बीघा १६ कठा मकान सहित
        ४. ४२ /१ , ४२ A & ४२ B चौरंगी रोड , कोलकाता
         ५. ५६ राधा बाज़ार स्ट्रीट , कोलकाता
          ६. वाल्फोर्ड ट्रांसपोर्ट ( E. I.)
           ७ . डेनवी रोड स्थित  क्वार्टर ( इ टाइप के २० और २७ नंबर को छोड़ कर )
           ८. मधुबनी स्थित भौड़ा गढ़ी
            ९. मुजफ्फरपुर लीज होल्ड
             १० . रांची की जमीन
              ११. कन्ह्याजी कोठी ,आनंदबाग  के  पीछे रकवा २ बीघा १० कठा
                १२. मोसद्दी लेन , दिवानिताकिया  और कैदराबाद
              १३. सोती लाइन के उत्तर से ४ क्वार्टर
               १४. तालाब - दिवानिताकिया , बलभद्रपुर , सागरपुर , नीम सागर , बेला टैंक ,अल्हुअपोखर, बाबूलाल                      वाला पोखर  
\\

                              उपरोक्त सम्पतियों में अधिकांश बेच दी गयी है वा कब्ज़ा दे दिया गया है . चूँकि यह ट्रस्ट की सम्पति है अतः इसकी जाँच होनी चाहिए ताकि  महाराजा के अंतिम विल के अनुरूप जन कल्याण के कार्य में इसका उपयोग हो सके और ट्रस्ट की सम्पति के साथ  अनियमितता ,लूट बंद हो .

Tuesday, 9 June 2015

ESTATE OF LATE MAHARAJADHIRAJA SIR KAMESHWAR SINGH OF DARBHANGA AS PER FAMILY SETLEMENT 1987

                                                   SCHEDULE --1
Statement showing estimated value of immovable & Movable Properties of the Estate of Late Maharajadhiraja Dr. Sir Kameshwara Singh of Darbhanga.
 Ptroperties located outside Darbhanga
 1. 42 Chowringhee , Calcutta
2. 5G Radhabazar Street
3. Varanasi - Darbhanha Palace, Nilkanth, Rani Kotha ,Mirghat ,Gomath, Manikarnika Land
4. Allahabad - 22 Chathem line, Darbhanga Castle
5. Baidyanath Dham -Land near Shivganga Tank & Salona
6. Ranchi Land
7. Muzaffarpur vLease Hold
8. Madhubani  Bhoara Palace
9. Kamakhya Hill, Assam
10. Mofassil Quartar in Circles.
Properties located at Darbhanga
1. Rambagh Compound Area ( about 54 Bighas )
   Note-- The above mentioned area within Rambagh compound is exclusive of the following:--
   a. Residential House known as Rambagh Palace ( with some adjoining land ) in which Maharani Rajylakhmi resided and which vested absolutely as per terms of the WILL in Kumar Subheshwar Singh after the demise of the said Maharani in 1976
   b. Under Kameshwara Religious Trust namely Kankali Mandir, Hari Mandir , Devi Mandir , Gsauni Ghar.
    c. One Tank and One Temple of Lakshmipur Trust.
     d.  Rameshwara Singh Regional Archive ( gifted to Govt. of Bihar )
 2. Hospital Area ( about 12 Bighas )
 3. A Type Bunglows On G. M. Road
  4. B type Quarters 1 to 4.
 5. C type quartes 1 to 6., Danby Road
  6. D type Quarters 7 to 14., Danby Road
 7. E type Quarters 14
 8. F type Quarters 15 Single Room - Twin quarters
  9. G type 6 Tiled House Jt.
10. Kanhyaji Kothi
11.Moment's Quarter
 12. Kabraghat House
13. Murari House
14. Ramkrishna Babu
15. Old S. Boarding House
16. 4 Quarters North of Soti Lines.
17. Land Kameshwara Market - Rly Station
18. Mosaddi Lane , Diwani takia
19. Mosaddi Lane at Kaidrabad
20. Land & Structures to Cold Storage (P) Ltd.
21. Tank- Sagarpur, Nim Sagar, Babulalwaia, Alhuapokhar, Bela Tank, Kabraghat, Diwani takia Balbhadarpur-L. sarai.
MOVEBLES
 Jewellery, Gold Cut Coins ,Time Piece & Watches.including 3 Diamonds Buttons ,Habib Gold Coins , Belgium Gel Coins , Cuff Link Pairs .
Shares & Securities Raj Controlled Copanies
  News Paper & Publication Ltd, Walfords , Darbhanga Laheriasarai Electric Supply Corporation Ltd, Darbhanga Investments, Darbhanga Properties, Darbhanga Cold Storage , Darbhanga Dairy , E. N. G. Co., Darbhanga Press, Darbhanga Sugar , Darbhanga Construction, Darbhanga Industries, Thacker Spink & Co., Park Acceptance.
 OTHERS MARKETABLE & IN LIQUIDATION:-
Rameshwar Jute , Telco, G.K.W., Indian Iron , Ashk Paper, Clibe Mills, Hindustan Bicycle, Indian Machinary, Press Syndicate, Newspaper Allahabad , Richardson & Crudas, Khas Karanpura, Buduan Elec.
 Security Account
 Elgin MIll, Titaghar


Schedule--II( Maharanidhirani Kamsundari Saheba )
Schedule-III (Sriman Rajeshwara Singh & Sriman Kapleshwara Singh)
Schedule-IV ( Kameshwara Singh Public Charitable Trust )
Schedule -V ( Katyayni Dai, , Dibyayani Dai, Sriman Ratneshwara Singh,, Rashmeshwara Singh,      Sriman Rajneshwara Singh,Smt. Netyayani Dai, Chetana Dai, Draupadi Dai, Anita Dai, Sunita Dai.
Schedule _ VI Properties earmarked for sale for payment of Liabilities.